बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग "देवों के घर 'देवघर' की पावन धरा पर, जहाँ प्रकृति स्वयं अपने सर्वोपरि श्रृंगार में प्रस्तुत होती है और हर कंकड़ में शिव का वास महसूस होता है, वहीं आरोग्य और कामना के दाता साक्षात् महादेव 'बैद्यनाथ' ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। संताल परगना की सघन आम्रकुंजों और शांत, सुरम्य वादियों के आँचल में स्थित यह दिव्य धाम, भक्तों के लिए मोक्ष और शांति का वह पावन सरोवर है, जहाँ आत्मा सीधे परमात्मा से मिलती है। मंदिर की स्थापत्य कला की भव्यता देखते ही बनती है; आकाश को चूमता इसका धवल शिखर और उस पर शिव-शक्ति के अटूट संबंध का प्रतीक लाल रेशमी 'गठबंधन', प्रेम, भक्ति और अटूट श्रद्धा की एक अनुपम, अमर कहानी कहता है, जो सदियों से युगों-युगों तक गूँजती आ रही है।" भूमिका (Introduction) झारखंड के देवघर में स्थित श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग सनातन धर्म की अटूट आस्था का प्रतीक है। इसे 'कामना लिंग' के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि माना जाता है कि यहाँ आने वाले हर भक्त की मनोकामन...
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग "अनंत और अनादि महादेव की महिमा का बखान शब्दों में कर पाना असंभव है, परंतु जब बात त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की आती है, तो आस्था और श्रद्धा स्वयं ही नतमस्तक हो जाती है। महाराष्ट्र के नासिक जिले में पुण्यसलिला गोदावरी के उद्गम स्थल और विशाल ब्रह्मगिरि पर्वत की गोद में स्थित यह पावन धाम केवल एक ज्योतिर्लिंग नहीं, बल्कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश के एकाकार होने का जीवंत प्रमाण है। सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरीतीरपवित्रदेशे। यद्दर्शनात्पातकपाशनाशं तं त्र्यम्बकेशं सततं नमामि॥ त्रयम्बकेश्वर की विशिष्टता:जहाँ त्रिदेव विराजते हैं: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्थान अत्यंत अद्वितीय और गौरवशाली है। महाराष्ट्र के नासिक जिले में ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित यह पावन धाम न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र है, बल्कि यहाँ की पौराणिक कथाएँ और वास्तुकला आज भी श्रद्धालुओं को अचंभित करती हैं। साधारणतः सभी ज्योतिर्लिंगों में केवल भगवान शिव का वास माना जाता है, परंतु त्रयम्बक...