श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग "नर्मदा की लहरों में बसा साक्षात 'ॐ': श्री ओंकारेश्वर।" "नर्मदा की पावन ने जहाँ स्वयं रचा 'ॐ' का आकार है, वहाँ आदिदेव ओंकारेश्वर के रूप में विराजे साक्षात करुणाकर हैं।" भूमिका (Introduction) मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पुण्यसलिला नर्मदा के तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय अध्यात्म का जीवंत स्पंदन है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ स्थान पर विराजमान यह धाम अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति के लिए विश्व विख्यात है। यहाँ नर्मदा नदी दो धाराओं में विभक्त होकर एक द्वीप का निर्माण करती है, जिसका आकार अंतरिक्ष से देखने पर साक्षात 'ॐ' (Om) प्रतीत होता है। इसे 'मान्धाता पर्वत' या 'शिवपुरी द्वीप' भी कहा जाता है। अध्यात्म की दृष्टि से ओंकारेश्वर वह स्थान है जहाँ शब्द (ॐ), जल (नर्मदा) और ज्योति (शिव) एक साथ एकाकार होते हैं। पौराणिक उत्पत्ति ओंकारेश्वर की उत्पत्ति के विषय में शिव पुराण और स्क...
आस्था दर्शन: भारतीय मंदिरों का गौरवशाली इतिहास, ज्योतिर्लिंगों के रहस्य और सनातन धर्म की पावन कथाओं का संगम। अध्यात्म की एक दिव्य यात्रा।