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श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: पौराणिक उत्पत्ति की कथा और मंदिर का गौरवशाली इतिहास

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत की अस्मिता का सूर्य और प्रथम ज्योतिर्लिंग "समय की रेत पर अंकित एक ऐसी गाथा, जिसे न तो समुद्र की लहरें मिटा सकीं और न ही आक्रमणकारियों की तलवारें।" भूमिका (Introduction) अरब सागर की लहरों के किनारे, गुजरात के वेरावल में स्थित 'सोमनाथ मंदिर' केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का जीवंत दस्तावेज है। इसे 'अमरता का मंदिर' कहा जाता है, क्योंकि इतिहास के तमाम आक्रमणों के बाद भी यह हर बार अपने भस्म से पुनर्जीवित होकर खड़ा हुआ है। ज्योतिर्लिंग की अवधारणा हिंदू धर्म में 'ज्योतिर्लिंग' उस प्रकाश पुंज को कहा जाता है जहाँ स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए थे। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सोमनाथ का स्थान प्रथम है: "सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥ परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥ वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे। हि...