श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग नील महोदधि के वक्षस्थल पर सुशोभित, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा बालुका से निर्मित 'श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग' भारतीय आस्था का शाश्वत स्तंभ है। यहाँ रत्नाकर स्वयं महादेव के पावन चरणों का अनवरत प्रक्षालन करता है। यह तीर्थ शैव-वैष्णव एकात्मता का दिव्य सेतु है, जिसका कण-कण शिवत्व की अनंत महिमा से आप्लावित है। रामेश्वरस्य महिमा वक्तुं न शक्यते मया। यस्य दर्शनमात्रेण सर्वपापक्षयो भवेत्॥ भावार्थ: भगवान रामेश्वर की महिमा का वर्णन करना मेरे (सूत जी के) लिए भी संभव नहीं है; इनके केवल दर्शन मात्र से ही मनुष्य के समस्त पापों का क्षय हो जाता है। प्रस्तावना: भक्ति का अनंत महासागर भारतवर्ष की दक्षिण दिशा में, जहाँ रत्नाकर (सागर) के हिलोरें निरंतर महादेव के चरणों का प्रक्षालन करते हैं, वहाँ एकादश ज्योतिर्लिंग के रूप में 'श्री रामेश्वरम' प्रतिष्ठित हैं। यह केवल एक देवालय नहीं, अपितु मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की अटूट शिव-भक्ति और 'हरि-हर...
आस्था दर्शन: भारतीय मंदिरों का गौरवशाली इतिहास, ज्योतिर्लिंगों के रहस्य और सनातन धर्म की पावन कथाओं का संगम। अध्यात्म की एक दिव्य यात्रा।